Saturday, April 20, 2019
मुझसे मत पूँछो की तुम्हारा प्यार कैसा है
मुझसे मत पूँछो की तुम्हारा प्यार कैसा है मेरे लिए ये मेरे बचपन जैसा है बेफ़िकर, खुला हुआ तेज़ हवाओं जैसाया बरसों के बाद वाली थकान की नींद जैसाजिसमे कब आँखें बंद होती हैं पता नहीं चलता बस नींद तोड़ने को जी नहीं करता
ये मेरे लिए मेरी माँ के हाथ के खाने जैसा हैउसके हाथ के चावल का भी अपना अलग स्वाद हैमेरे लिए ये मेरे स्कूल जैसा हैजो कब मेरी दुनिया बन गया पता नहीं चलामेरे लिए ये मेरी किताब जैसा हैजिसपर पहली बार क़लम चलाने को जी नहीं चाहतापर अपना लगने पर उसे घिस देता हूँभाई से दोस्तों से सबसे पढ़वायाऔर ये तेरा प्यार ऐसा ही तो है
मेरे लिए ये Sunday की छुट्टी से पहले वाली रात हैजो लगता है कि कभी ख़त्म ना होइसके आगे एक और दिन है की शांतिबस तू इस सुकून जैसा हैतू मुझसे मत पूँछ तेरा प्यार कैसा है
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